दिल्ली में बस कंडक्टरों के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वो बड़ा हाजिर जवाब होतें हैं... और अंग्रेजी के दो-चार शब्दों के बार-बार इस्तेमाल से मुसाफिरों को चकित कर देते हैं... स्टॉप पर बस के रुकते ही कंडक्टर यात्रियों को जगह का नाम लेते हुए पुकारते हैं... लेकिन बस में जगह नहीं रहने पर नो मोर प्लीज... नोर मोर प्लीज.. का रटा रटाया जुमला फेंकते हुए अपना असर दिखाने की कोशिश करते हैं... उसके बाद फिर से हवा में अंग्रेजी का एक जुमला फेंकते हैं... ‘टिकिट’ प्लीज… लेकिन खुद को शेर समझने वाले ऐसे बस कंडक्टर्स को कभी कभी दिल्ली के हाजिर जवाब बाशिंदे खड़े खड़े चित कर देते हैं... ऐसे ही एक मौके पर डीटीसी बस के एक कंडक्टर ने बस स्टॉप पर भीड़ को देखते हुए... पहले तो मुसाफिरों की तरफ मुखातिब हुए... और फिर अंग्रेजी का वही तोता रटंत जुमला फेंका... लेडीज फर्स्ट प्लीज... मुसाफिरों ने जुमले को फॉलो किया.. बस स्टॉप पर खड़ीं सभी महिलाएं चढ़ गईं... लेकिन जब मर्दों की बारी आई.. तो संयोगवश कंडक्टर ने फिर से जुमला फेंक दिया.. और कहा...नो मोर प्लीज...नो मोर प्लीज...छूटते ही काफी देर से बस का इंतजार कर रहे एक बुजुर्ग ने जवाबी जुमला फेक दिया... अरे ओ बस कंडक्टर... तूने सारी मोरनी तो चढ़ा ली... मोर की बारी आई तो नो मोर प्लीज...इस बार बुजुर्ग की इस गुगली पर कंडक्टर क्लीन बोल्ड हो गया था... लेकिन बस के अंदर और स्टॉप पर खड़े मुसाफिरों को हंसी का टॉनिक मिल गया... माहौल में फैला तनाव गायब हो चुका था.. स्टॉप पर खड़े बाकी के मुसाफिर.... शॉरी मोर और मोरनी... दूसरी बस का इंतजार करने लगे... धन्यवाद...
'फुलटॉस' में वेलकम
फुलटॉस की गली में आपका स्वागत है...यहां गुगली, बाउंसर, यॉर्कर के अलावा अपनी पसंद के बॉल फेंकने की खुली छूट है...इतना ही नहीं..यहां आउट होने के बाद भी पिच पर टिके रहने की इज़ाजत है... ख्याल बस इतना रहे कि बेशरम और बेरहम नहीं होना है... हां ये जरूर चाहूंगा कि पवेलियन जाने से पहले फिर से आने का वादा हो...
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3 comments:
बहत सुन्दर ,बधाई.
5/10
मजेदार
achcha chutkula ban gaya.
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