ब्लू लाइऩ शब्द सुनते ही दिल्ली, दिल्ली की बस सेवा और उसके कंडक्टर-ड्राइवर की सारी तस्वीरें एक झटके में सामने आ जाती हैं... जिन लोगों ने दिल्ली में थोड़ा वक्त भी गुजारा है...उऩ्हें अच्छी तरह से ब्लू लाइन का मतलब पता है... कंडक्टर और ड्राइवर मतलब... बेअदब, बिगड़ैल, बेमुरव्वत, बदतमीज.... और न जाने क्या-क्या लफ्ज इनके बारे में बेधड़क निकल जाते हैं... लेकिन जब ये मुसाफिरों को समोसे खिलाने की बात करें... तो सुनकर काफी हैरानी हो सकती है... है भी ये अचंभे की बात... चलिए बता ही दूं इनकी कहानी.. हुआ यूं कि.. एक दिन मैं और मेरा एक साथी राजीव.... अपने घर लक्ष्मीनगर लौट रहा था... तब हम दोनों ही दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र हुआ करते थे... और डीटीसी के मंथली कॉन्सेसन पास का भरपूर फायदा...सॉरी...आनंद उठाते थे... फ्री में दिल्ली और नोएडा भ्रमण का शौक पूरा होना छात्र जीवन की बड़ी उपलब्धियां मानी जाती थीं... मैं और राजीव भी दस से बाहर नहीं थे... लेकिन दिल्ली की सरकार बदलते ही हमारी उपलब्धियों में कई और चांद जड़ गए... डीटीसी के पासेस अब ब्लू लाइन में भी मान्य कर दिए गए... यानी लॉटरी निकलने के बाद अगर पता चले कि इनाम में मिलने वाला रैनसम रुपए में नहीं... बल्कि डॉलर में मिलेंगे... तो नाचे मन मोरा.... वाली स्थिति हो जाना लाजिमी है... कमोबेश यही स्थिति पासधारक छात्रों की भी थी... लेकिन अक्खड़ मिजाज ब्लू लाइन संचालक भला इसे कब मानने लगे... फिर क्या था... आए दिन ब्लू लाइन पासधारकों और कंडक्टर के बीच तू-तू मैं-मैं की कहानी आम बात हो गई... लेकिन ब्लू लाइन वालों को अगर डर था... तो एक पुलिस से... दूसरे छात्रों से.... शातिर बस कंडक्टर छात्रों से पंगा तो नहीं लेता... लेकिन वो बस स्टॉप पर छात्रों की भीड़ देखते ही बस भगा ले जाता... रोक कर सवारी चढ़ाने का कोई सवाल ही नहीं था... लेकिन छात्र भी निकले बीस... तू डाल डाल तो मैं पात पात की नीति अपना ली.... छात्र ऐसे में अब अक्सर बस स्टॉप पर खड़े न होकर.... उससे आगे जाकर खड़े होने लगे... साथ ही इस अंदाज में ब्लू लाइन को रोकने का इशारा करते.... जैसे लगता कि ये आम मुसाफिर हैं... छात्र होने का शक इन ड्राइवरों को जार भी न हो... इसका पूरा ध्यान रखते थे....
मैं और राजीव भी एक दिन आईटीओ में ब्लू लाइऩ पर सवार होने के लिए.... छात्रों के बीच मशहूर हो चुके ऐसी ही टेक्निक का इस्तेमाल किया.... आईटीओ के बस स्टॉप से आगे जाकर रेड लाइट से पहले हम दोनों खड़े हो गए... उम्मीद के मुताबिक हाथ देते ही ब्लू लाइन बस रुक गई.... दिक्कत की बात ये थी कि बस में इक्के-दुक्के सवारी ही मौजूद थे... और कंडक्टर हर किसी से पैसे लेने के मूड में था... ऐसे में कंडक्टर बड़ी आस से टिकट निकालते हुए कहा कि हां भई कहां का टिकट दूं... मेरे दोस्त ने छूटते ही कहा... पास.... कुढ़ा-चिढ़ा कंडक्टर भी तपाक से बोल पड़ा... समोसे लाऊं सर... गरमागरम चाय के साथ... आस पास बैठी सवारियां कंडक्टर के इस जुमले पर जोर से हंस पड़े... हंसी तो हम दोनों को भी काफी आ रही थी... लेकिन कंडक्टर की इस अनचाही और अनायास प्रतिक्रिया पर हम दोनों हैरान और अवाक थे... लेकिन हम ठहरे छात्र... वो भी बिहार से आए किसी ऐरे-गैरे गांव के... सवारियां चढ़ती-उतरती रहीं... हम अपने गंतव्य तक पहुंचने का इंतजार करते रहे.... इस बीच कनखियों में कंडक्टर हमें... और हम कंडक्टर को देखते रहे... घूरते रहे... वैसे टक्कर तो नहीं हुई... लेकिन टक्कर की आशंका दोनों तरफ से थी... उसे छात्र ग्रंथि का डर था॥ तो हमें बिगडैल जाट का भय... लक्ष्मीनगर बस स्टॉप आते ही हम दोनों विनम्र छात्र से कब शेर दिल छात्र में बदल गए... पता ही नहीं चला... कंडक्टर भी लड़कियों की तरह आंखों की भाषा समझने में माहिर था... चुप रहना ही ठीक समझा... लेकिन जाते जाते मेरे दोस्त ने जबावी जुमला ठोक ही दिया... हां भई कंडक्टर... तेरे ऑफर का क्या हुआ... समोसे और चाय नहीं लाए... वैसे बता दूं॥ मैं कॉपी पीता हूं... और यहां ज्यादा बोले... तो तेरा खून भी पीऊंगा... मुझे ये समझते देर नहीं लगी... कि वाकई हम शेर(जानवर) बन गए थे... दिल से ही नहीं... व्यवहार से भी... क्योंकि ये सारा माजरा सिर्फ तीन रुपए के टिकट से शुरू हुआ था... कानूनी तौर पर हम गलत नहीं थे... तो पापी पेट के लिए वो भी गलत नहीं था... समझदारी आने में कभी कभी काफी लंबा वक्त लग जाता है... शायद देर आए दुरुस्त आए... चलता हूं...
नोट - आप मेरे न्यूअर और ओल्डर पोस्ट पर भी अपने महत्वपूर्ण कमेंट्स भेजकर मेरा उत्साहवर्धन करें.... धन्यवाद...
'फुलटॉस' में वेलकम
फुलटॉस की गली में आपका स्वागत है...यहां गुगली, बाउंसर, यॉर्कर के अलावा अपनी पसंद के बॉल फेंकने की खुली छूट है...इतना ही नहीं..यहां आउट होने के बाद भी पिच पर टिके रहने की इज़ाजत है... ख्याल बस इतना रहे कि बेशरम और बेरहम नहीं होना है... हां ये जरूर चाहूंगा कि पवेलियन जाने से पहले फिर से आने का वादा हो...
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